top header advertisement
Home - राष्ट्रीय << मीटू : यौन उत्‍पीड़न के आरोपों से घिरे केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने दिया पद से इस्‍तीफा

मीटू : यौन उत्‍पीड़न के आरोपों से घिरे केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने दिया पद से इस्‍तीफा



नई दिल्ली। मी टू के आरोपों के चलते विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मी टू के तहत एम जे अकबर पर 20 महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इस्तीफा देने के बाद एम जे अकबर ने मीडिया में अपना लिखित बयान जारी कर अपनी बात कही है।

यौन शोषण के आरोपों से घिरे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर के खिलाफ पत्रकार प्रिया रमानी समेत कई महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। एमजे अकबर द्वारा मानहानि का केस दर्ज कराने के बाद प्रिया रमानी के समर्थन में 20 महिला पत्रकार सामने आई हैं।

ये सभी महिला पत्रकार 'द एशियन एज' अखबार में काम कर चुकी हैं। इन महिला पत्रकारों ने एक संयुक्त बयान में रमानी का समर्थन करने की बात कही है। साथ ही, अदालत से आग्रह किया है कि अकबर के खिलाफ उन्हें सुना जाए।

'अकेली नहीं हैं प्रिया रमानी ....'
संयुक्त बयान में दावा किया गया है कि उनमें से कुछ (महिला पत्रकारों) का अकबर ने यौन उत्पीड़न किया है, जबकि कई अन्य इसकी गवाह हैं। महिला पत्रकारों ने अपने हस्ताक्षर वाले संयुक्त बयान में कहा है, 'इस लड़ाई में प्रिया रमानी अकेली नहीं हैं।

हम मानहानि के मामले सुनवाई कर रही माननीय अदालत से आग्रह करते हैं कि याचिकाकर्ता (एमजे अकबर) के हाथों हममें से कुछ के यौन उत्पीड़न को लेकर और अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं (महिला पत्रकारों) की गवाही पर विचार किया जाए, जो इस उत्पीड़न की गवाह थीं।’

इन महिला पत्रकारों ने जारी किया संयुक्त बयान
'द एशियन एज' अखबार में काम कर चुकीं पत्रकारों जिन्होंने संयुक्त बयान पर दस्तखत किए हैं, उनमें मीनल बघेल (1993-1996), मनीषा पांडेय (1993-1998), तुषिता पटेल (1993-2000), कणिका गहलोत (1995-1998), सुपर्णा शर्मा (1993-1996), रमोला तलवार बादाम (1994-1995), होइहनु हौजेल (1999-2000), आयशा खान (1995-1998), कुशलरानी गुलाब (1993-1997), कनीजा गजारी (1995-1997), मालविका बनर्जी (1995-1998), ए टी जयंती (1995-1996), हामिदा पार्कर (1996-1999), जोनाली बुरागोहैन, मीनाक्षी कुमार (1996-2000), सुजाता दत्ता सचदेवा (1999-2000), रेशमी चक्रवाती (1996-98), किरण मनराल(1993-96) और संजरी चटर्जी शामिल हैं। डेक्कन क्रॉनिकल की एक पत्रकार क्रिस्टीना फ्रांसिस (2005-2011) ने भी इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं।

Leave a reply