कार्रवाई के लिए हादसे का इंतजार क्यों ? दीवार गिरने की घटना से जागे नगर निगम ने तोड़े जर्जर मकान
उज्जैन - एक सप्ताह पहले तेज बारिश के कारण महाकाल मंदिर के समीप महाराजवाड़ा स्कूल की पुरानी दीवार गिरने की घटना के बाद नगर निगम प्रशासन अचानक से सक्रिय हो उठा। निगम ने घटना से सबक लेते हुए पहले महाकाल मंदिर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया और उसके बाद हरसिद्धी क्षेत्र में भी कार्रवाई करते हुए कई सारे अतिक्रमणों को जेसीबी की मदद से हटा दिया। इसके बाद अब नगर निगम को उन मकानों की भी याद आई, जो जर्जर हालत में हैं और शायद बारिश से पहले ही इन्हें गिराया जाना था। टीम ने शहर के अलग-अलग इलाकों में ऐसे मकान जो जर्जर होकर गिरने की स्थिति में थे, उन्हें जेसीबी व गैंग सदस्यों की सहायता से गिराने की कार्रवाई की। निगम अमले नेे शुक्रवार को पुराने शहर और नए शहर में तीन पुराने व जर्जर मकान का गिराऊ हिस्सा हटाया।
क्यों नहीं समय पर की जाती कार्रवाई ?
नगर निगम के शिल्पज्ञ विभाग के निर्देश पर निगम की रिमुव्हल गैंग ने शुक्रवार को पुराने शहर के गोला मंडी, दादा भाई नौरोजी मार्ग और फ्रीगंज में सिंधी कॉलोनी के एक जर्जर और गिराऊ मकान को गिराने की कार्रवाई की। दोपहर में नगर निगम की टीम ने जेसीबी और गैंग की सहायता से चिन्हित जर्जर भवनों का वो हिस्सा तोड़ा, जो गिरने की स्थिति में था।
अब हुई जान-माल की चिंता
नगर निगम द्वारा ये कार्रवाई जान माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई। निगम कर्मचारियों का कहना था कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शहर के ऐसे मकान, जो पुराने और जर्जर हो चुके हैं, उन्हें भी नगर निगम द्वारा गिराया जाएगा। अब सवाल ये उठता है कि एक सप्ताह में ही जान माल कि चिंता क्यों हुई। जबकि ये मकान लंबे समय से जर्जर हालात में पड़े थे और इन्हें बारिश के पहले तोड़ा जाना था, लेकिन तब इन पर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसा लगता है कि निगम प्रशासन भी किसी हादसे का इंतजार कर रहा था। महाराजवाड़ा स्कूल हादसे के बाद एकाएक नगर निगम को शहर के जर्जर मकानों की याद आई और निगम दल द्वारा कार्रवाई की गई।
गौरतलब है कि 27 सितंबर की शाम महाकाल मंदिर के समीप बाउंड्रीवाल गिरने की घटना में पूजन सामग्री बेचने वाले दो लोगों की मौत हो गई थी और दो लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद कोई और घटना-दुर्घटना न हो, इस लिहाज नगर निगम प्रशासन शहर में कार्रवाइयां करने में जुट गया है।