मुख्यमंत्री ने हमारे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा किया
"अन्न उत्सव" के दौरान पात्रता पर्ची और राशन वितरण से खिले हितग्राहियों के चेहरे
उज्जैन | इस संसार में मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है भोजन। इस संसार में हरेक मनुष्य दिन-रात इसलिये ही कड़ी मेहनत करता है, ताकि उसे दो समय का भोजन प्राप्त हो सके और यदि यह आवश्यकता पूरी करने में वह असमर्थ हो तो फिर इसके लिये कई बार वह गलत रास्ते तक अख्तियार कर लेता है तो कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने आत्मसम्मान को ताक पर रखते हुए भोजन प्राप्त करने के लिये दूसरों के सामने हाथ तक फैला देते हैं। एक बार इंसान अन्य विलासिता के साधनों के बगैर तो रह सकता है, लेकिन बिना भोजन के वह नहीं रह सकता। प्रकृति ने इस संसार में रहने वाले सभी जीव-जन्तुओं के लिये पर्याप्त भोजन और जल की व्यवस्था की थी, लेकिन मनुष्यों ने अपने बीच गरीबी और अमीरी का भेदभाव खड़ा किया, जिस वजह से समाज का एक वर्ग तो दो समय का भोजन बड़ी आसानी से कर सकता है, लेकिन समाज के नीचले और गरीब वर्ग के लोगों की थाली से आज भी भोजन की पहुंच दूर है।
इस मुश्किल कार्य को आसान बनाने का काम मध्य प्रदेश सरकार ने किया है। बुधवार को पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के अन्तर्गत ऐतिहासिक अन्न उत्सव मनाया गया। इस दौरान प्रदेश के 37 लाख नवीन लाभार्थियों को राशन वितरण और पर्ची वितरण का कार्य किया गया। जीवन की इस सबसे बड़ी आवश्यकता की पूर्ति होने पर हितग्राहियों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी और वे सरकार के प्रति बार-बार आभार व्यक्त कर रहे थे। उज्जैन में कालिदास संस्कृत अकादमी के परिसर में भी हितग्राहियों को राशन व पर्ची वितरण का कार्य सम्पन्न किया गया। इस दौरान कई हितग्राहियों ने बिते दिनों हुए दु:खद अनुभव और आज के दिन हुई सुखद अनुभूति के बारे में बताया।
"लॉकडाउन में थूली खई के दिन निकाल्या"
शहर के मालीपुरा में रहने वाली 70 वर्षीय गोदावरीबाई के परिवार में पति और एक बेटा-बहू हैं। कुछ समय पहले बेटा उसकी पत्नी के साथ अलग रहने लगा था। गोदावरीबाई फूल बेचने का व्यवसाय कर अपना जीवन यापन किसी प्रकार कर रही थी। कोरोना संक्रमण के चलते तीन महीने लगे लॉकडाउन के कारण फूलों का व्यवसाय पूरी तरह से ठप पड़ गया था। गोदावरीबाई ने बताया कि इस दौरान खाने-पीने की भी उन्हें इतनी समस्या हो गई थी कि उन्होंने कई दिन सिर्फ एक समय दलिया (थूली) खाकर अपना व पति का गुजारा किया। अब से उन्हें शासन की योजना के अनुसार प्रति सदस्य पांच-पांच किलो गेहूं व चावल और एक किलो नमक एक रुपये की दर से प्रतिमाह दिया जायेगा। गोदावरीबाई ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार गरीबों के लिये मां अन्नपूर्णा के समान है। दो वक्त का भोजन समय पर मिल सके, इसके लिये शासन की यह योजना अत्यन्त लाभकारी है।
बिते दिनों कैसे गुजारा किया ये तो सिर्फ अल्लाह ही जानता है
शहर के जूना सोमवारिया मदीना कॉलोनी निवासी 42 वर्षीय भूरी-युसूफ ने बताया कि तीन साल पहले शौहर के इंतकाल के बाद घर चलाने की जिम्मेदारी उन पर और परिवार के दो बड़े बेटों पर आ गई थी। भूरी के परिवार में छह लोग हैं। सामान्य दिनों में भी परिवार का गुजर-बसर काफी मुश्किल से होता था। भूरी लोगों के घरों में बर्तन साफ कर गुजारा करती थी और उनके दो बेटे दुकान पर मजदूरी करते थे। कोरोना संक्रमण के कारण लोगों ने उन्हें घर में आने से मना कर दिया था। बेटे भी दुकान बन्द होने के कारण मजदूरी करने के लिये नहीं जा पा रहे थे। उसके बाद तो घर की आर्थिक हालत बिगड़ती ही चली गई। भूरी उन यादों को ताजा करके सिहर उठती है। उन्होंने कहा कि उन दिनों परिवार का गुजारा कैसे किया ये तो सिर्फ अल्लाह ही जानता है। अनलॉक की प्रक्रिया प्रारम्भ होने के बाद भी उनकी जिन्दगी पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाई। कभी काम मिलता है तो दो वक्त की रोटी खा लेते हैं और नहीं मिलता है तो उस दिन भूखे पेट सोना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने हमेशा से गरीब वर्ग के लोगों की फिक्र की है और इस योजना के माध्यम से कई गरीबों को दो वक्त की रोटी नसीब हो सकेगी।
गोदावरीबाई और भूरी-युसूफ जैसे कई हितग्राहियों ने अपने अनुभव साझा किये। निश्चित रूप से खुशियों की यह दास्तां निरन्तर जारी रहेगी।